
आज के युद्धक्षेत्र में छोटे और कम लागत वाले ड्रोन का खतरा तेजी से बढ़ रहा है, जिससे जमीनी सैनिकों के लिए नई चुनौतियां खड़ी हो गई हैं। इसी खतरे से निपटने के लिए अमेरिकी सेना का C5ISR सेंटर अब व्यक्तिगत सैनिकों के स्तर पर एंटी-ड्रोन (C-UAS) क्षमताओं को बेहतर बनाने पर ध्यान केंद्रित कर रहा है। यह पहल सैनिकों के सीधे अनुभव और प्रतिक्रिया पर आधारित है, जिसका उद्देश्य ऐसे समाधान विकसित करना है जो मौजूदा उपकरणों में आसानी से फिट हो सकें और अतिरिक्त बोझ न डालें। यह वैश्विक रक्षा के लिए एक महत्वपूर्ण बदलाव का संकेत है, जहाँ भारत सहित कई देश अपनी सीमाओं पर ऐसे ही खतरों का सामना कर रहे हैं। इस विकास से भारतीय रक्षा उद्योग के लिए भी कई महत्वपूर्ण सबक और अवसर मिल सकते हैं।
क्या है पूरा मामला?
अमेरिकी सेना का C5ISR सेंटर, जो C5ISR आवश्यकताओं के आसपास उन्नत तकनीक विकसित करने पर केंद्रित है, व्यक्तिगत सैनिकों के लिए ड्रोन-विरोधी (Counter-Unmanned Aircraft System या C-UAS) क्षमताओं को बढ़ाने के लिए काम कर रहा है। अधिकारियों ने बुधवार को बताया कि यह पहल सैनिकों से मिली प्रतिक्रिया पर आधारित है, जिसका लक्ष्य जमीनी स्तर पर सामरिक क्षमताओं को मजबूत करना है। पिछले एक साल से, सेंटर उद्योग द्वारा विकसित समाधानों का सर्वेक्षण कर रहा है जो व्यक्तिगत सैनिकों और छोटी इकाइयों को C-UAS क्षमताएं प्रदान कर सकें। सेंटर अब उद्योग भागीदारों की तलाश में है।
अमेरिकी सेना के अधिकारियों ने क्या कहा?
सैनिक और प्लेटफॉर्म मिशन इक्विपमेंट की सहायक निदेशक जेमी डेविस ने कहा कि उनका मुख्य लक्ष्य उन नई तकनीकों पर ध्यान केंद्रित करना है जो सैनिकों के मौजूदा उपकरणों के साथ एकीकृत हो सकें या उनका लाभ उठा सकें। उन्होंने स्पष्ट किया कि इसका उद्देश्य C-UAS के लिए विशेष रूप से भारी-भरकम, बड़े या अधिक पावर-खर्चीले उपकरण जोड़ना नहीं है। C5ISR सेंटर की निदेशक बेथ फेरी ने बताया कि सैनिकों के लिए एक प्राथमिक आवश्यकता यह जानना है कि क्या कोई UAS (ड्रोन) उन पर नजर रख रहा है।
डेविस ने सर्वेक्षण के निष्कर्षों पर प्रकाश डालते हुए बताया कि बाजार में ऐसे “अनोखे, अतिरिक्त उपकरण” मौजूद हैं जो शायद हर सामरिक सैनिक के लिए टिकाऊ नहीं हैं। उन्होंने यह भी कहा कि हर सैनिक को C-UAS के लिए एक जैसे उपकरण की आवश्यकता नहीं हो सकती है। इसके बजाय, यह “फॉर्मेशन-आधारित” हो सकता है, जिससे छोटी इकाई के भीतर बोझ को वितरित किया जा सके। रिसर्च एंड टेक्नोलॉजी इंटीग्रेशन निदेशालय के सैन्य उप-प्रमुख मेजर एंड्रयू डर्फी ने ड्रोन को हराने के लिए स्थानीय C-UAS समाधान प्राप्त करने में सेंसर डेटा एकीकरण को एक महत्वपूर्ण प्रयास बताया।
व्यक्तिगत सैनिक के लिए काउंटर-ड्रोन समाधान
अमेरिकी सेना के C5ISR सेंटर का ध्यान ऐसे काउंटर-ड्रोन समाधान विकसित करने पर है जो मौजूदा सैन्य उपकरणों के साथ सहजता से जुड़ सकें। इसका मतलब है कि सैनिकों को अपने साथ बहुत सारे नए और विशिष्ट उपकरण नहीं ले जाने होंगे। बल्कि, उनके वर्तमान रेडियो, सेंसर और अन्य गियर को अपग्रेड या एकीकृत करके ही ड्रोन का पता लगाने और उनसे निपटने की क्षमता प्रदान की जाएगी। यह दृष्टिकोण सैनिकों के बोझ को कम करने और उनकी परिचालन दक्षता बढ़ाने पर केंद्रित है। सेंटर सॉफ्टवेयर-आधारित समाधानों में विशेष रुचि रखता है जो सैनिकों द्वारा पहले से उपयोग किए जा रहे Sensors का लाभ उठा सकें।
L3Harris Technologies का Wraith Shield: एक उदाहरण
इस साल की शुरुआत में, L3Harris Technologies ने Wraith Shield पेश किया, जो एक Software Upgrade है। यह सैनिकों द्वारा पहने जाने वाले Falcon 4 Tactical Radios में उपयोग की जाने वाली मौजूदा Waveforms को अपग्रेड करता है, जिससे वे छोटे, कम लागत वाले ड्रोन का पता लगाने और उन्हें हराने के लिए Radio Frequencies का लाभ उठाते हुए Sensors में बदल जाते हैं। Wraith Shield ने अमेरिकी सेना की “Jailbreak” प्रक्रिया को सफलतापूर्वक पूरा कर लिया है, जो विक्रेताओं को यह साबित करने की अनुमति देती है कि उनके सिस्टम को सेवा के डेटा लेयर के साथ एकीकृत किया जा सकता है ताकि वास्तविक समय की जानकारी साझा की जा सके।
एकीकरण और परतदार संवेदन पर जोर
C5ISR सेंटर का सिपाही-केंद्रित C-UAS प्रयास केवल व्यक्तिगत रूप से पहने जाने वाले उपकरणों तक सीमित नहीं है। सेंटर “लेयर्ड सेंसिंग” (Layered Sensing) दृष्टिकोण पर ध्यान केंद्रित कर रहा है, जिसमें विभिन्न प्लेटफॉर्म पर उपकरण शामिल हो सकते हैं। इसमें Infantry Squad Vehicle, Unmanned Ground Vehicle और स्वयं सैनिक शामिल होंगे, जिन्हें एक सामान्य समाधान में नेटवर्क किया जा सकता है। यह एक एकीकृत दृष्टिकोण है जहां विभिन्न Sensor डेटा को एक साथ मिलाकर क्रॉस-क्यूइंग किया जाता है, जिससे ड्रोन का पता लगाने और उन्हें निष्क्रिय करने की क्षमता बढ़ जाती है।
भारतीय रक्षा के लिए निहितार्थ
अमेरिकी सेना की यह पहल भारतीय सेना के लिए भी महत्वपूर्ण सबक प्रदान करती है। भारतीय सेना भी सीमाओं पर और आंतरिक सुरक्षा में छोटे ड्रोन से बढ़ते खतरों का सामना कर रही है। व्यक्तिगत सैनिक स्तर पर C-UAS क्षमताएं विकसित करने से जमीनी सैनिकों की सुरक्षा और जागरूकता में वृद्धि होगी। मौजूदा उपकरणों के साथ नए समाधानों को एकीकृत करने का दृष्टिकोण भारतीय संदर्भ में भी लागत प्रभावी और व्यावहारिक हो सकता है, जहां बड़ी संख्या में सैनिकों को नए विशेष उपकरण प्रदान करना चुनौतीपूर्ण हो सकता है। यह सीमावर्ती इलाकों और काउंटर-इंसर्जेंसी ऑपरेशंस में भारतीय सैनिकों की क्षमता को काफी बढ़ा सकता है।
चीन और पाकिस्तान पर सामरिक प्रभाव
चीन और पाकिस्तान दोनों ही सीमा पार से निगरानी और हमले के लिए ड्रोन का तेजी से इस्तेमाल कर रहे हैं। व्यक्तिगत सैनिकों के लिए प्रभावी काउंटर-ड्रोन क्षमताओं का विकास भारत के लिए एक महत्वपूर्ण सामरिक लाभ हो सकता है। यह दुश्मन के कम लागत वाले ड्रोन को निष्क्रिय करके हमारी अग्रिम पंक्ति की इकाइयों की भेद्यता को कम करेगा। यह क्षमता न केवल घुसपैठ और निगरानी को रोकेगी, बल्कि सैनिकों को युद्धक्षेत्र में अधिक आत्मविश्वास के साथ काम करने में भी मदद करेगी, जिससे हमारे विरोधियों की ड्रोन युद्ध रणनीति का मुकाबला करने में भारत की स्थिति मजबूत होगी।
Make in India और Defence Industry पर असर
यह विकास “आत्मनिर्भर भारत” और “Make in India” रक्षा पहल के लिए भी प्रेरणा का स्रोत बन सकता है। भारतीय रक्षा उद्योग, DRDO और निजी कंपनियां अमेरिकी दृष्टिकोण का अध्ययन कर सकती हैं ताकि मौजूदा भारतीय सैन्य उपकरणों के साथ एकीकृत होने वाले हल्के और अधिक समन्वित C-UAS समाधान विकसित किए जा सकें। सॉफ्टवेयर-आधारित समाधानों और Acoustics Detection जैसी नई तकनीकों पर ध्यान केंद्रित करने से भारतीय रक्षा स्टार्टअप्स और अनुसंधान केंद्रों को नवाचार के लिए नए रास्ते मिल सकते हैं, जिससे स्वदेशी उत्पादन और Defence Manufacturing को बढ़ावा मिलेगा।
आगे क्या होगा?
C5ISR सेंटर का सिपाही-केंद्रित C-UAS प्रयास वर्तमान में प्रयोगशाला चरण में है, और अभी तक इसका परीक्षण शुरू नहीं हुआ है। केंद्र के निदेशक बेथ फेरी ने बताया कि एक नया नवाचार प्रयास चल रहा है जो हल्के सेंसिंग तकनीक पर केंद्रित है जिसे सैनिक ध्वनिक (Acoustic) पहचान करने के लिए पहन सकते हैं। विभिन्न ड्रोन प्लेटफार्मों की अलग-अलग ध्वनिक Signature होती हैं, और अन्य उपकरणों के साथ एकीकृत सेंसर एक ड्रोन का पता लगा सकते हैं, जिसके परिणामस्वरूप Alert मिल सकता है। आगे, प्रयोगशाला परीक्षणों के सफल होने के बाद, इन समाधानों का फील्ड में परीक्षण किया जाएगा। सेंटर “लेयर्ड और डायवर्सिफाइड दृष्टिकोण” पर केंद्रित है, और C-UAS को अपनी मुख्य क्षमता मानता है।
निष्कर्ष
अमेरिकी सेना द्वारा व्यक्तिगत सैनिकों के लिए काउंटर-ड्रोन क्षमताओं को विकसित करने का यह प्रयास आधुनिक युद्ध की बदलती प्रकृति का एक महत्वपूर्ण संकेत है। सैनिकों की सीधी प्रतिक्रिया के आधार पर, यह C5ISR सेंटर मौजूदा उपकरणों में एकीकृत होने वाले हल्के, छोटे और अधिक कुशल समाधानों पर ध्यान केंद्रित कर रहा है। L3Harris Technologies के Wraith Shield जैसे सॉफ्टवेयर अपग्रेड और ध्वनिक पहचान जैसी नई प्रौद्योगिकियों में रुचि दिखाती है कि कैसे कम लागत वाले ड्रोन के खतरे का सामना अभिनव और एकीकृत तरीकों से किया जा सकता है। यद्यपि यह परियोजना अभी प्रयोगशाला चरण में है, लेकिन इसका “लेयर्ड और डायवर्सिफाइड दृष्टिकोण” दिखाता है कि भविष्य में सैनिकों को ड्रोन के बढ़ते खतरों से बचाने के लिए क्या आवश्यक होगा। भारत के लिए, यह अपनी रक्षा क्षमताओं को बढ़ाने और आत्मनिर्भरता की दिशा में बढ़ने के लिए एक मूल्यवान मॉडल प्रस्तुत करता है।
महत्वपूर्ण सवाल (FAQs)
1. अमेरिकी सेना किस नई रक्षा क्षमता पर काम कर रही है?
अमेरिकी सेना का C5ISR सेंटर व्यक्तिगत सैनिकों और छोटी इकाइयों के लिए काउंटर-ड्रोन (C-UAS) क्षमताओं को बेहतर बनाने पर काम कर रहा है, ताकि जमीनी स्तर पर सामरिक सुरक्षा को मजबूत किया जा सके।
2. यह पहल किस प्रतिक्रिया पर आधारित है?
यह पहल व्यक्तिगत सैनिकों से मिली प्रतिक्रिया और उनके युद्धक्षेत्र के अनुभवों पर आधारित है, जिसका उद्देश्य उनकी तत्काल जरूरतों को पूरा करना है।
3. C5ISR सेंटर का मुख्य लक्ष्य क्या है?
सेंटर का मुख्य लक्ष्य ऐसी नई तकनीकों पर ध्यान केंद्रित करना है जो सैनिकों के मौजूदा उपकरणों के साथ एकीकृत हो सकें या उनका लाभ उठा सकें, ताकि अतिरिक्त भारी-भरकम उपकरण का बोझ न पड़े।
4. सैनिकों की सबसे महत्वपूर्ण आवश्यकता क्या है?
सैनिकों की एक प्राथमिक आवश्यकता यह जानना है कि क्या कोई Unmanned Aircraft System (UAS) या ड्रोन उन पर नजर रख रहा है।
5. L3Harris Technologies ने क्या समाधान पेश किया है?
L3Harris Technologies ने Wraith Shield नामक एक सॉफ्टवेयर अपग्रेड पेश किया है, जो सैनिकों के Falcon 4 Tactical Radios को छोटे ड्रोन का पता लगाने और उन्हें निष्क्रिय करने के लिए सेंसर में बदल देता है।
6. “लेयर्ड सेंसिंग” दृष्टिकोण क्या है?
“लेयर्ड सेंसिंग” एक ऐसा दृष्टिकोण है जिसमें Infantry Squad Vehicle, Unmanned Ground Vehicle और सैनिकों जैसे विभिन्न प्लेटफॉर्म पर लगे उपकरणों को एक सामान्य समाधान में नेटवर्क किया जाता है ताकि ड्रोन का पता लगाने की क्षमता बढ़ाई जा सके।
7. क्रॉस-क्यूइंग का क्या महत्व है?
मेजर एंड्रयू डर्फी के अनुसार, सेंसर डेटा एकीकरण के माध्यम से क्रॉस-क्यूइंग, ड्रोन को निष्क्रिय करने सहित स्थानीय C-UAS समाधानों को प्राप्त करने में एक महत्वपूर्ण प्रयास है।
8. C5ISR सेंटर किन नई इनोवेशन तकनीकों पर विचार कर रहा है?
सेंटर हल्की सेंसिंग तकनीक पर विचार कर रहा है जिसे सैनिक Acoustic Detection के लिए पहन सकते हैं, जो विभिन्न ड्रोन प्लेटफार्मों की अलग-अलग ध्वनिक Signature का उपयोग करके चेतावनी देगा।
9. इस सैनिक-केंद्रित C-UAS प्रयास की वर्तमान स्थिति क्या है?
यह सैनिक-केंद्रित C-UAS प्रयास अभी प्रयोगशाला चरण में है और अभी तक इसका परीक्षण शुरू नहीं हुआ है।
10. इस विकास से भारतीय रक्षा को क्या लाभ हो सकता है?
यह विकास भारतीय सेना के लिए भी प्रासंगिक है क्योंकि यह सीमा पार से ड्रोन खतरों का मुकाबला करने के लिए हल्के, एकीकृत और प्रभावी C-UAS समाधान विकसित करने की दिशा में एक मॉडल प्रदान कर सकता है।


