Bhargavastra Air Defence भारत की स्वदेशी रक्षा तकनीक में एक बड़ा कदम साबित हो सकता है। Solar Defence & Aerospace Ltd. (SDAL) के चेयरमैन सत्यनारायण नुवाल के अनुसार, वर्ष 2030 तक Bhargavastra को तीन-स्तरीय (Three-Layer) Counter-Drone Air Defence System के रूप में विकसित करने का लक्ष्य है, जिसकी इंटरसेप्शन क्षमता 2.5 किलोमीटर, 6 किलोमीटर और 25 किलोमीटर तक हो सकती है।
यदि यह योजना साकार होती है, तो भारतीय सेना को Drone Swarm, Kamikaze Drone और Loitering Munition जैसे आधुनिक हवाई खतरों से निपटने के लिए एक मजबूत सुरक्षा कवच मिलेगा। हालांकि, 25 किलोमीटर रेंज वाला चरण अभी आधिकारिक रूप से स्वीकृत कार्यक्रम नहीं है, बल्कि SDAL चेयरमैन द्वारा प्रस्तुत भविष्य का विज़न है। इस लेख में जानिए Bhargavastra की मौजूदा क्षमताएं, 2030 की प्रस्तावित तीन-स्तरीय रक्षा प्रणाली और यह भारत की वायु सुरक्षा के लिए कितना महत्वपूर्ण साबित हो सकता है।
Bhargavastra Air Defence: 2030 तक भारत बनाएगा 3-लेयर Drone Defence Shield, Pakistan और China के लिए बढ़ेगी चुनौती!
Bhargavastra Air Defence भारत की स्वदेशी रक्षा तकनीक में एक बड़ा कदम साबित हो सकता है। Solar Defence & Aerospace Ltd. (SDAL) के चेयरमैन सत्यनारायण नुवाल के अनुसार, वर्ष 2030 तक Bhargavastra को तीन-स्तरीय (Three-Layer) Counter-Drone Air Defence System के रूप में विकसित करने का लक्ष्य है, जिसकी इंटरसेप्शन क्षमता 2.5 किलोमीटर, 6 किलोमीटर और 25 किलोमीटर तक हो सकती है। यदि यह योजना साकार होती है, तो भारतीय सेना को Drone Swarm, Kamikaze Drone और Loitering Munition जैसे आधुनिक हवाई खतरों से निपटने के लिए एक मजबूत सुरक्षा कवच मिलेगा। हालांकि, 25 किलोमीटर रेंज वाला चरण अभी आधिकारिक रूप से स्वीकृत कार्यक्रम नहीं है, बल्कि SDAL चेयरमैन द्वारा प्रस्तुत भविष्य का विज़न है। इस लेख में जानिए Bhargavastra की मौजूदा क्षमताएं, 2030 की प्रस्तावित तीन-स्तरीय रक्षा प्रणाली और यह भारत की वायु सुरक्षा के लिए कितना महत्वपूर्ण साबित हो सकता है।
Bhargavastra Air Defence क्या है?
Bhargavastra एक स्वदेशी Counter-Drone System है, जिसे Solar Defence & Aerospace Ltd. ने विकसित किया है। इसका उद्देश्य छोटे ड्रोन, Drone Swarm, Loitering Munition और अन्य कम ऊंचाई पर उड़ने वाले हवाई खतरों को समय रहते पहचानकर नष्ट करना है। आधुनिक युद्धों में ड्रोन का उपयोग तेजी से बढ़ा है। रूस-यूक्रेन युद्ध और पश्चिम एशिया के संघर्षों ने दिखाया है कि कम लागत वाले ड्रोन भी बड़े सैन्य ठिकानों को नुकसान पहुंचा सकते हैं। इसी बदलते युद्धक्षेत्र को ध्यान में रखते हुए भारत भी अपनी स्वदेशी Counter-Drone क्षमता को मजबूत कर रहा है।
Drone Swarm क्यों बन रहा है सबसे बड़ा खतरा?
आज केवल एक ड्रोन ही चुनौती नहीं है, बल्कि दर्जनों या सैकड़ों ड्रोन एक साथ हमला कर सकते हैं। इसे Drone Swarm Attack कहा जाता है। ऐसे हमलों में पारंपरिक Air Defence System पर अत्यधिक दबाव पड़ता है क्योंकि महंगी Surface-to-Air Missiles का उपयोग छोटे और सस्ते ड्रोन पर करना आर्थिक रूप से व्यवहारिक नहीं होता।
Drone Swarm का उपयोग दुश्मन रडार, एयरबेस, गोला-बारूद डिपो, कमांड सेंटर और महत्वपूर्ण सैन्य प्रतिष्ठानों को निशाना बनाने के लिए कर सकता है। ऐसे खतरे से निपटने के लिए कम लागत वाले, तेज प्रतिक्रिया देने वाले और बड़ी संख्या में इंटरसेप्टर रखने वाले सिस्टम की आवश्यकता होती है।
Bhargavastra कैसे काम करता है?
Bhargavastra में कई आधुनिक तकनीकों का समावेश किया गया है। यह रडार और Electro-Optical/Infrared (EO/IR) सेंसर के माध्यम से लक्ष्य का पता लगाता है। लक्ष्य की पुष्टि होने के बाद Command and Control System इंटरसेप्टर को लॉन्च करता है।
वर्तमान Bhargavastra सिस्टम लगभग 2.5 किलोमीटर तक Hard-Kill Interception के लिए डिज़ाइन किया गया है। Hard Kill का अर्थ है कि ड्रोन को सीधे मार गिराया जाता है, जबकि Soft Kill तकनीक में Electronic Warfare या GPS Jamming के माध्यम से ड्रोन को निष्क्रिय किया जाता है।
Bhargavastra की सबसे बड़ी विशेषताओं में से एक इसकी बड़ी संख्या में Micro Interceptors को तेजी से दागने की क्षमता मानी जाती है, जिससे Drone Swarm जैसे हमलों का प्रभावी ढंग से मुकाबला किया जा सके।
2030 तक तीन-स्तरीय Air Defence Vision
SDAL के चेयरमैन सत्यनारायण नुवाल के अनुसार, वर्ष 2030 तक Bhargavastra को तीन अलग-अलग रेंज वाली Layered Defence System में विकसित करने की योजना है।
पहली Layer – 2.5 किलोमीटर
यह वर्तमान Hard-Kill क्षमता का प्रतिनिधित्व करती है। यदि कोई ड्रोन अंतिम चरण में सैन्य ठिकाने के करीब पहुंच जाता है, तो यह लेयर उसे तुरंत नष्ट करने का प्रयास करेगी। यह अंतिम सुरक्षा कवच (Last Line of Defence) का कार्य करेगी।
दूसरी Layer – 6 किलोमीटर
दूसरी लेयर का उद्देश्य खतरे को और अधिक दूरी पर रोकना होगा। यदि ड्रोन या Loitering Munition को पहले ही चरण में इंटरसेप्ट कर लिया जाए, तो सैन्य ठिकानों पर उसका खतरा काफी कम हो जाएगा। इससे प्रतिक्रिया के लिए अतिरिक्त समय भी मिलेगा।
तीसरी Layer – 25 किलोमीटर
सबसे महत्वाकांक्षी चरण 25 किलोमीटर इंटरसेप्शन रेंज का है। यदि यह क्षमता विकसित होती है, तो दुश्मन के ड्रोन को लक्ष्य तक पहुंचने से काफी पहले रोका जा सकेगा। हालांकि, यह स्पष्ट करना आवश्यक है कि 25 किलोमीटर क्षमता अभी आधिकारिक रूप से स्वीकृत कार्यक्रम नहीं है। यह SDAL चेयरमैन द्वारा साझा किया गया भविष्य का विज़न है और इसके विकास, परीक्षण तथा सरकारी स्वीकृति की प्रक्रिया भविष्य में तय होगी।
भारतीय सेना को क्या लाभ मिलेगा?
भारत की पश्चिमी और उत्तरी सीमाओं पर ड्रोन का खतरा लगातार बढ़ रहा है। पाकिस्तान की ओर से सीमा पार ड्रोन के माध्यम से हथियार, गोला-बारूद और नशीले पदार्थ भेजने की घटनाएं सामने आती रही हैं। वहीं चीन लगातार आधुनिक Unmanned Aerial Systems और Drone Technology में निवेश कर रहा है।
यदि Bhargavastra का तीन-स्तरीय संस्करण सफलतापूर्वक विकसित होता है, तो यह भारतीय सेना, वायुसेना और अन्य सुरक्षा एजेंसियों को एयरबेस, फॉरवर्ड पोस्ट, रडार स्टेशन, मिसाइल यूनिट, गोला-बारूद डिपो और महत्वपूर्ण रक्षा प्रतिष्ठानों की सुरक्षा में अतिरिक्त मजबूती प्रदान कर सकता है।
मौजूदा भारतीय Air Defence नेटवर्क में भूमिका
भारत पहले से ही Akash Missile System, QRSAM, VSHORADS, L-70 Air Defence Gun, ZU-23 तथा Integrated Counter-UAS जैसी प्रणालियों पर कार्य कर रहा है। Bhargavastra इनका विकल्प नहीं होगा, बल्कि विशेष रूप से छोटे ड्रोन और Drone Swarm जैसे खतरों के विरुद्ध एक पूरक (Complementary) प्रणाली के रूप में कार्य कर सकता है।
आधुनिक युद्ध में Layered Air Defence का महत्व लगातार बढ़ रहा है। विभिन्न रेंज और विभिन्न प्रकार के इंटरसेप्टर मिलकर बहु-स्तरीय सुरक्षा प्रदान करते हैं, जिससे किसी भी हवाई खतरे के सफल होने की संभावना कम हो जाती है।
Drone Warfare का बदलता स्वरूप
पिछले कुछ वर्षों में Drone Warfare युद्ध की रणनीति का महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुका है। अब केवल बड़े लड़ाकू विमान ही नहीं, बल्कि छोटे और सस्ते ड्रोन भी युद्ध का परिणाम प्रभावित कर सकते हैं। कम लागत वाले Kamikaze Drone, Surveillance Drone और Loitering Munition ने आधुनिक सैन्य अभियानों की प्रकृति बदल दी है।
ऐसी स्थिति में भारत द्वारा स्वदेशी Counter-Drone तकनीकों पर निवेश आत्मनिर्भर रक्षा उद्योग के लिए भी महत्वपूर्ण है। इससे आयात पर निर्भरता कम होगी और भविष्य में निर्यात की संभावनाएं भी बढ़ सकती हैं।
चीन और पाकिस्तान के लिए क्या संदेश?
यदि Bhargavastra का तीन-स्तरीय संस्करण निर्धारित लक्ष्य के अनुसार विकसित होता है, तो भारत की निम्न-ऊंचाई वाली Air Defence क्षमता में महत्वपूर्ण वृद्धि होगी। इससे सीमावर्ती क्षेत्रों में Drone Swarm और Loitering Munition आधारित हमलों के विरुद्ध बेहतर सुरक्षा उपलब्ध हो सकती है।
पाकिस्तान द्वारा उपयोग किए जाने वाले छोटे ड्रोन और चीन की उन्नत UAV तकनीकों के संदर्भ में यह क्षमता भारतीय रक्षा व्यवस्था को मजबूत बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम हो सकती है। हालांकि, 25 किलोमीटर इंटरसेप्शन क्षमता को लेकर किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले इसके आधिकारिक विकास, सफल परीक्षण और सरकारी स्वीकृति का इंतजार करना आवश्यक होगा।
आगे की राह
Bhargavastra केवल एक Counter-Drone System नहीं, बल्कि भारत की भविष्य की Layered Air Defence रणनीति का संभावित हिस्सा बन सकता है। यदि 2030 तक प्रस्तावित तीनों लेयर विकसित होती हैं, तो भारत Drone Warfare के क्षेत्र में एक नई तकनीकी क्षमता हासिल कर सकता है। फिलहाल उपलब्ध आधिकारिक जानकारी के अनुसार वर्तमान प्रणाली का विकास और परीक्षण जारी है, जबकि 6 किलोमीटर और 25 किलोमीटर वाली क्षमताएं भविष्य की परिकल्पना हैं। इसलिए इनके बारे में अंतिम निष्कर्ष आधिकारिक घोषणाओं और परीक्षण परिणामों के बाद ही निकाले जा सकेंगे।



